तन्हाई

 

तन्हाई ने एक दिन
मुझसे चुपके से यूं कहा,
दिल तुम्हारा आजकल
ऐसे क्यों धडक रहा ?
अपनी धडकनों से तुम कुछ क्यों नहीं कहते,
हंसी-खुशी वो चुपचाप शान्त क्यों नहीं रहते ?
मैं तो अब भी हुँ तुम्हारे साथ
यूँ ही कसकर थामे रखो मेरा हाथ ।

मैं मंद-मंद मुसकाया
आँखें मुंदकर इशारों में ही ये जताया,
सुनी है,
मैंने भी धडकनों की बात,
खफ़ा हैं वे तुमसे आज रात ।
जशन की रात भी तुम देरी से आते हो
उस पर बहाने पे बहाने बनाए जाते हो ।

पता है,
हमें भी मौसम का मिज़ाज़ खुब,
तुम भी धीरे-धीरे बदल रहे हो अपना रंग-रुप ।
सुना है,
तुम्हारे दोस्तों की ज़मात भी बढती ही जा रही
उस फ़हरिस्त में हमारी यारी नीचे ही फिसलती आ रही ।

याद है,
जब शहर में तुम नए-नए थे
एक छत की तलाश में
दिन-भर फिरते रहते थे
थोडा़ हैरान, कुछ परेशान ।
अपने अच्छे-बुरे कई दोस्तों की बातों को अनसुनी कर
बुलावा दिया था तुम्हें एक शाम अपने घर पर।

उस शाम,
अपनी कहानी कहते-कहते ही सो गए थे तुम
अंधेरे में देख ना पाया
कि रात भर इतने रोए थे तुम ।
बात सुबह समझ में आई
जब पाया, की तकिया तब भी गीला पडा़ था ।
हाथ बढा़कर मैंने कहा था
मेरे कमरे में ही क्यों नहीं रह जाते ।
लिखते-पढते,
सुनते-सुनाते,
नए-पुराने कुछ गीत गुनगुनाते
कट जाएगी ज़िन्दगी यूं ही दिन-रात ।

वैसे भी,
मैं भीड़-भाड़, शोर-शराबे से दूर रहता हुँ
अक्सर पार्टीयों में भी बडा़ बोर होता हुँ
सच्ची-सच्ची कहना
क्या तुम दोगे मेरा साथ ?
तो कसकर थाम लूँ मैं आज ही तुम्हारा हाथ ।

एक वो दिन था
और एक आज का दिन है ,
अब तुम स्वार्थी हो गए हो
कुछ को रुलाते हो
कुछ को सताते हो ।
अपने दोस्तों को समझाते क्यों नहीं
तुमसे दोस्ती सबकी फितरत में नहीं ।

और तुम भी
बंगला-गाडी़ के चक्कर में मत पड़ना
खुशी अगर वहाँ होती
तो तुम्हें फिर क्यों कहते लोग अपना ।
अब बस लौट आओ,
आखिरी कुछ सांसों में तो दोगे तुम मेरा साथ,
तुम्हारे संग
शायद यही हो जशन की आखिरी आज रात ।

Published in: on फ़रवरी 19, 2007 at 3:58 अपराह्न  Comments (7)  

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7 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. Oh wait. Yes, I have. I’m sorry, but I just don’t have it in me right now to type it all out again. Besides, it was just ramblings anyway. You didn’t want to hear me go on and on about this, right?

  2. YOU ROCK MAN !!!!
    Keep it up …

    Cheers !!
    Nimit

  3. Aap ki bhawnaye bahut hi mithhi hai.Usse bhi achhi aapki bhasha hai.mai to aapko aapni bahut sari shubhkamnaye deta hu.aap aage badhate jaye..
    aap raho aapni duniya me khoye,
    aapko gumo ki chhaya na pare,
    jindgi ho aapki lambi ,
    aapki raho me koi kanta na rahe.
    Jai Bharat.

  4. Tanhayi ko apne bahut positive way me express kiya hai………….warna tanhayi ek negative thought bankar rah gaya hai……………….inshaalla aap aise hi khubsoorat kavitaye likhte rahe aur hum inko padte rahe…………
    nisha

  5. superb…

  6. wah

  7. Realy true lines ,i love …………………………….


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